धरने की अनुमति रद्द, 'संविधान बचाओ देश बचाओ' अभियान जारी
लेखक: मुफ्ती सालिम खान इशाअती | हालात-ए-हाज़िरा (18 सितंबर 2026)
जंतर-मंतर पर धरने की अनुमति से इनकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक है: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
’संविधान बचाओ, देश बचाओ’ आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा।
नई दिल्ली: 17 सितंबर 2026
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने दिल्ली पुलिस द्वारा बोर्ड के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन और धरने को अंतिम समय में अनुमति देने से इनकार करने पर गहरी चिंता और निंदा व्यक्त की है। बोर्ड ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नागरिकों का मौलिक और संवैधानिक अधिकार है, जिसे प्रशासनिक फैसलों से छीना नहीं जाना चाहिए।
बोर्ड के प्रवक्ता और ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ आंदोलन’ के संयोजक डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने पिछले दस दिनों में तीन बार पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने का दौरा कर एसएचओ और डीसीपी को आश्वासन दिया था कि धरने में तय संख्या से अधिक लोग शामिल नहीं होंगे। इसके बावजूद धरने से ठीक एक दिन पहले यह कहकर अनुमति रद्द कर दी गई कि पुलिस को बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की आशंका है। बोर्ड ने इस फैसले को एकतरफा और अनुचित बताते हुए कहा कि इससे पहले भी जंतर-मंतर पर बोर्ड द्वारा कई शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं, जिनमें सभी तय नियमों का पालन किया गया था।
बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यह धरना देशव्यापी ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ’ आंदोलन का पहला चरण था। इस आंदोलन का उद्देश्य देश के वंचित और पीड़ित वर्गों, अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुसलमानों के मौलिक अधिकारों के हनन, मॉब लिंचिंग की घटनाओं, जान-माल व मान-सम्मान पर हमलों, मस्जिदों, मदरसों व मुस्लिम बस्तियों पर बुलडोज़र कार्रवाई, धार्मिक व सांस्कृतिक स्वतंत्रता पर रोक, मुस्लिम पर्सनल लॉ के संरक्षण, समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के प्रयासों, और ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य करने जैसे मुद्दों पर जनता का ध्यान आकर्षित करना है।
बोर्ड ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा 2029 तक भाजपा शासित सभी राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने के बयान ने देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता तथा नागरिकों के मौलिक अधिकारों को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। मुसलमान अपने पर्सनल लॉ के संरक्षण को अपने धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों का हिस्सा मानते हैं। भारत विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और भाषाओं का देश है और संविधान इस विविधता की रक्षा करता है। बोर्ड के अनुसार, इस विविधता को प्रभावित करने वाली कोई भी नीति गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़े करती है।
बोर्ड ने ‘वंदे मातरम’ के सभी छंदों को अनिवार्य करने के प्रयास पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि देशभक्ति की अभिव्यक्ति के लिए किसी विशेष गीत की पूरी प्रस्तुति को अनिवार्य करना धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक स्वतंत्रताओं के संबंध में महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।
देश की वर्तमान आर्थिक और सामाजिक स्थिति का उल्लेख करते हुए बोर्ड ने कहा कि गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दे और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे बुनियादी मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। ऐसे समय में जनता का ध्यान बुनियादी समस्याओं से हटाकर धार्मिक और सांप्रदायिक मुद्दों की ओर मोड़ना देशहित में नहीं है।
बोर्ड ने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा करना तथा देश में न्याय, स्वतंत्रता, समानता, मानवीय गरिमा और भाईचारे के माहौल को मजबूत करना है। जंतर-मंतर पर अनुमति न मिलने के बावजूद यह देशव्यापी अभियान तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने वाले प्रमुख व्यक्तित्व:
* मौलाना उबैदुल्लाह खान आजमी (उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड)
* जनाब सैयद सादतुल्लाह हुसैनी (उपाध्यक्ष, AIMPLB व अमीर, जमात-ए-इस्लामी हिंद)
* मौलाना असगर अली इमाम मेहदी सलफी (उपाध्यक्ष, AIMPLB व अमीर, मरकज़ी जमीयत अहले हदीस हिंद)
* मौलाना मोहम्मद फजलुर्रहीम मुजद्दिदी (महासचिव, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड)
* मौलाना मोहम्मद उमरेन महफूज़ रहमानी (सचिव, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड)
* मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी (महासचिव, जमीयत उलमा-ए-हिंद)
* डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास (प्रवक्ता, AIMPLB व संयोजक, ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ’ अभियान)
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